Monday, August 29, 2011

एक बार फिर कुदरत ने हमसे चाहा उसकी सर्वोच्चता का सम्मान

अमेरिका में आये तेज़ चक्रवात,वर्षा और अंधड़ ने पिछले दिनों स्तब्ध कर दिया. प्रकृति के तांडव को किंकर्तव्य विमूढ़ता से देखने का कहीं कोई विकल्प नहीं था.हमारा देश होता तो जो कुछ होना था,हो चुकता और तब हमें पता चलता.पर वह अमेरिका है,प्रकृति ने उसे नोटिस दिया.उस महान देश ने भी पूरे सामर्थ्य से विभीषिका से निपटने में अपनी तैयारी का साहसिक प्रदर्शन किया.लाचारी को न्यूनतम कर लेने के उस ज़ज़्बे को सलाम.सुरक्षा सावधानी और आपदा-प्रबंधन ही वह श्रीफल है जिसे हम कुदरत के कोप के समक्ष चढ़ा सकते हैं.

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