Sunday, March 13, 2011

अमेरिका की यह खाई चौड़ी नहीं है

आजकल एक दौर आया हुआ है, जिसमे लोग आने वाले समय की कल्पना करते हैं और अटकलें लगाते हैं कि तब जीवन कैसा होगा। आने वाले कल को लेकर जिज्ञासु होना एक अच्छा संकेत है। लेकिन जब हम इन कपोल-कल्पित बातों के ज़खीरे को खंगालने बैठते हैं तो एक बात सामने आती है।हम इस तरह बात करते हैं कि आज जीवन ऐसा है और उस समय ऐसा होगा। किन्तु हम इस तथ्य को नज़रन्दाज़ कर जाते हैं कि किसी समय भी सबका जीवन एक सा नहीं होता। बहुत सारे लोग जीवन में बहुत आगे होते हैं, उसी तरह ढेर सारे लोग समय से पीछे भी होते हैं। अतः जब ऐसे आलेखों में ऐसी शंका जताई जाती है कि ' चालीस साल बाद सब कुछ इतना तकनीकी हो जायेगा कि भेड़-बकरी चराने वाले भी उन्हें रिमोट से हैंडल करेंगे...' तो बात की विश्वसनीयता अपने आप दाव पर लग जाती है।क्योंकि भेड़-बकरी चराने वालों के पास अभी वह तकनीक पहुचने में ही बीसियों साल लगेंगे जो आज की मौजूदा तकनीक है। ऐसे में बात अतिशयोक्ति बन कर उसकी गंभीरता खंडित हो जाती है।
खैर , ऐसे सवाल उठाने के पीछे यह मंशा नहीं है कि कल्पना का गला घोटा जाये या हर बात में नकारात्मकता तलाशी जाये। मैं केवल यह कहना चाहता हूँ कि ' ग्लोबल ' होने का मतलब यह भी है कि जीवन में पिछड़ते जा रहे लोगों को साथ लेने की कोशिश भी की जाये। कुछ लोग पथ प्रदर्शक के रूप में आगे अवश्य बढ़ें पर कोई सफलता तभी कारगर होगी जब उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए सुलभ बनाने पर ध्यान दिया जायेगा।
अमेरिका की तारीफ का एक कारण यह भी बनता है कि यहाँ बहुत पिछड़े नहीं छोड़े जाते। देश के सबसे अमीर और सबसे गरीब व्यक्ति के बीच का अंतर अपेक्षाकृत कम है।

1 comment:

  1. @'ग्लोबल' होने का मतलब यह भी है कि जीवन में पिछड़ते जा रहे लोगों को साथ लेने की कोशिश भी की जाये।

    ऐसा होना ही चाहिये।

    वर्ड वैरिफिकेशन हटा दीजिये, टिप्पणी करने में कठिनाई होती है। यदि चाहें तो मॉडरेशन लागू कर सकते हैं।

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