Saturday, March 5, 2011

100post पूरी

आपको बधाई कि आपने मेरी १०० बातें सुनलीं। अब कुछ ठहर कर...

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सेज गगन में चाँद की [24]

कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी। उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके ...

Lokpriy ...