Saturday, June 4, 2011

वाद कमीज़ उतारें या पहनें पर रामदेवजी कहाँ हैं?

थोड़ी देर पहले मैंने साम्यवाद और पूंजीवाद का अंतर बताने के लिए जो उदाहरण दिया था, वह मेरे एक मित्र को समझ में नहीं आया. मैं उसे थोड़ा विस्तार से बता ही रहा था कि मेरे मोबाइल पर सन्देश आया- बाबा रामदेव को सरकार ने लापता कर दिया है, अतः विरोध प्रकट करने के लिए बुद्धि-शुद्धि यज्ञ करें.मैं असमंजस में पड़ गया.
मैंने जो उदाहरण दिया था, उसके अनुसार एक पेड़ के नीचे मंहगी ब्रांडेड कमीज़ पहन कर एक लड़का बैठा है. पूंजीवाद के अनुसार वह संतुष्ट और सम्पन्न है. लड़के को गर्मी लग रही है और कमीज़ नई होने से थोड़ी असुविधा भी हो रही है, साम्यवाद कहता है कि वह उसे उतार फेंके[समाजवाद कहता है कि उतार कर करीने से रख दे] पर पूंजीवाद कहता है कि वह पंखा,कूलर या एसी  का इंतजाम करले.
अब रामदेव जी के समाचार से इस बात को जोड़ देना वक्त का तकाजा है. बाबा रामदेव के सत्याग्रह से सरकार को गर्मी लगी. सरकार के पास भी तात्कालिक रूप से तीन विकल्प थे. पहला, सरकार उनकी बात मानते हुए भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंके या कम से कम उस दिशा में कोई कदम उठाती दिखाई दे.दूसरा विकल्प यह था कि वह रामदेवजी, अन्ना हजारे आदिको साथ लेकर इस देशव्यापी समस्या को जड़ से मिटाने के लिए कोई दीर्घकालीन कार्य-योजना बनाने की दिशा में बढे. तीसरा विकल्प यह था कि आधी रात को उनको तितर-बितर करने के लिए आंसू-गैस लेकर हमला कर दे और उन्हें जबरन उठा कर उनके समर्थकों की नज़र से ओझल करने के लिए इधर-उधर करती रहे. कौन सा विकल्प किस वाद के तहत आता है, यह तो कुछ साल बाद तय होगा जब देश के विश्व-विद्यालय अपनी बोर्ड ऑफ़ स्टडीज़ की बैठकों में ऐसे विकल्पों को मंज़ूर करके इनके "वाद" निर्धारित कर देंगे, पर अभी रामदेवजी को तो ढूंढो. सरकार भीड़ से नहीं डरती. डरती है तो भीड़ के नेता से.        

4 comments:

  1. @ सरकार भीड़ से नहीं डरती. डरती है तो भीड़ के नेता से.

    भीड तो गर्वोन्मत्त सत्ता द्वारा हमेशा कुचली जाती रही है, पर विचार कभी दफनाये नहीं जा सके.

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  2. hamare liye ek achchhi baat yah hai ki itihaas me bheed dwara garvonmatta satta ko kuchal dene ki misalen bhi darz hain. bas, waqt apne kalendar se tareekhen khud chunta hai.

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  3. http://shayaridays.blogspot.com

    hum kuch nhi kahenge..

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  4. aapke paas kahne ko itna kuchh hai ki is par kahne ka kaam aap aaram se chhod sakte hain. fir bhi aapne bahut kuchh kah diya dhanywad.

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