Thursday, June 2, 2011

केन्या, ज़िम्बाब्वे और साऊथ अफ्रीका को क्रिकेट में कौन लाया?

एक मकान की छत पर विचारों में तल्लीन एक व्यक्ति टहल रहा था. तभी उसके ठीक सामने कुछ दूरी पर एक बड़ा सा पत्थर तेज़ी से आकर गिरा. व्यक्ति ने क्रोध से तमतमाकर चिल्लाते हुए कहा- ये पत्थर यहाँ कौन लाया? 
संयोग से उसी समय आकाश से कुछ देवदूत गुज़र रहे थे. आवाज़ सुन कर एक देवदूत बोल पड़ा- इसे तुम्हारे पड़ौसी बच्चे की शरारत यहाँ लाई.आदमी ने चौंक कर ऊपर देखा. तभी दूसरा देवदूत बोल पड़ा- इसे पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति यहाँ लाई. आदमी हैरान होकर कुछ कहता, इस से पहले ही तीसरा देवदूत चिल्लाया- इसे खुद तुम्हारी शरारत यहाँ लाई, तुम बच्चों को गली में खेलने जो नहीं देते? 
यह सब सुनकर व्यक्ति गुस्से से पागल हो गया. वह उन देवदूतों को श्राप देने के से अंदाज़ में बोला- तुम में से जिसकी भी बात गलत हो, वही आकर ज़मीन पर गिरे. पर ज़मीन पर कोई नहीं गिरा. 
तो ज़िम्बाब्वे, केन्या और साऊथ अफ्रीका को क्रिकेट में क्रिकेट का "पूंजीवाद" लाया. खेलों का भौगोलिक "साम्राज्यवाद" लाया. वहां के खिलंदड़े युवाओं के जुनून का "समाजवाद" लाया. एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप महा-द्वीपों से अमेरिका की दिशा में बढ़ी क्रिकेट-ज्वर की लहर का "साम्यवाद" लाया, और विश्व-मीडिया का "बाजारवाद" लाया.
यदि ज़मीन पर अगले कुछ सालों में कोई देवदूत नहीं गिरा, तो शायद हम ज़ल्दी ही अमेरिका को भी विश्व-क्रिकेट में देखें.   

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