Tuesday, January 1, 2013

आज मैंने केवल तीन झूठ बोले

जब मैं सोकर उठा, तब धूप निकल चुकी थी। मैं उठ कर खिड़की पर आया, तो बेजान सा सूरज दिखाई दिया। पूरी ताकत से रौशनी फेंक रहा था, पर उसकी गर्मी में दम नहीं था। मैं उठ कर मेज़ के पास चला आया।टेबल का कलेंडर दिखाई दिया। कलेंडर सिर पकड़ कर बैठा था, उससे तारीख तक बताई नहीं जा रही थी। मैं खीज गया। मूड ठीक करने के लिए मैंने एक प्याला चाय पीने का मन बनाया। न जाने चाय कैसी अजीब सी थी। ऐसा लगता था, जैसे साल भर पुराने दूध से बनी हो।
मैंने उकता कर मोबाइल उठाया। ऐसा लग रहा था, जैसे इस पर कोई घंटों बात करता रहा हो। मैसेज बॉक्स ठसाठस भरा हुआ था, जैसे ढेर सारे लोग दरवाज़े पर दस्तक देदेकर गए हों।
मैं सोचता रहा, आखिर बात क्या है?
तभी एकाएक मेरा माथा ठनका।
मैंने एकदम से मन ही मन अपने आप को अपराधी घोषित किया,और बाकी सबको बेगुनाह। मेरी स्थिति उस कबीर की सी हो गई, जो बुरा देखने निकला तो उसे कोई बुरा न मिला और जो उसने खुद अपना ही मन टटोला तो वो खुद ही सबसे बुरा निकला।
तो आज एक जनवरी है। यानी नया साल शुरू!
तो बेचारा सूरज क्या करता, इकत्तीस दिसंबर की रात थी, तो ठंडी होनी ही थी। उसकी गर्मी में दम कैसे होता? पृथ्वी से कितनी दूर था वह।  पिछले साल का कलेंडर इस साल की तारीख कैसे बताता?चाय का दूध 2012 का था, उसमें भला स्वाद कैसे होता? ऐतिहासिक दूध। मोबाइल पर तो उन हितैषियों की आवाज़ के निशाँ थे, जो मुझे न्यू-ईयर विश करना चाहते थे।
मुझे स्मार्ट इंडियन का ख्याल आया, जो अमेरिका में रहते हैं,लेकिन भारत में रहने वालों से ज्यादा भारतीय हैं। वे हमारी संस्कृति के सशक्त संवाहक हैं। मैंने सोचा, उन्हें शुभकामनाएं ज़रूर पहुंचानी चाहिए।
मृत्युंजय कुमार और अनुराग शर्मा ने मेरे नववर्ष संकल्प को पसंद किया। यद्यपि मृत्युंजय मेरे ब्लॉग पर "जय"के नाम से आये थे, पर मैंने उन्हें पहचान लिया, ठीक वैसे ही, जैसे अनुराग जी को। उन दोनों के साथ आपको भी नव-वर्ष शुभ हो।

     

2 comments:

  1. नववर्ष के प्रथम प्रभात पर मेरा प्रणाम पहुँचे!

    ReplyDelete

सेज गगन में चाँद की [24]

कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी। उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके ...

Lokpriy ...