Friday, January 11, 2013

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और इलाहाबाद कुम्भ

एक के शुरू होने की तैयारी है, एक शुरू।
एक में हज़ारों के पंजीकरण, दूसरे में लाखों की उम्मीद।
हम सचमुच नैतिक, सांस्कृतिक,साहित्यिक, धार्मिक हैं या उत्सव-धर्मिता हमारा शगल?
धर्म जो सिखाता है, साहित्य जो कहता है, उस से हमारे सरोकार कैसे हैं?
साहित्य महोत्सव का विज्ञापन कह रहा है कि  वहां शर्मीला टैगोर कविता पाठ करेंगी। एक बड़े मीडिया हाउस का विज्ञापन है कि निर्वस्त्र साधुओं के शाही स्नान का लाइव कवरेज सबसे पहले उनकी तरफ से।
दोनों स्थानों पर प्रशासनिक तैयारियां ज़ोरों पर।
मकर संक्रांति माहौल को जीवंत बनाने को है।
पतंग और डोर बच्चों और युवाओं के हाथों में है।
अमेरिका, यूरोप की बर्फ़बारी, और आस्ट्रेलिया की गर्मी और आग, एकसाथ सुर्ख़ियों में हैं।
आने वाले दिन बहुत अच्छे होंगे।
तमाम हलचल और उमंग के लिए शुभकामनाएं।    

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