Friday, January 4, 2013

यह गणित से नहीं, मनोविज्ञान से होगा

कागज़ पर बचपन, किशोरावस्था या युवावस्था लिखने से पहले हमें किसी दर्जी की तरह उनके शरीर का माप, किसी मनोचिकित्सक की तरह उनके अंतःकरण के अक्स, और किसी मित्र की तरह उनके विवेक के प्रतिबिम्ब लेने होंगे। तब हम कह पायेंगे कि वे बच्चे हैं, किशोर हैं, या युवा हैं।
वे बच्चे हैं, यदि-
वे माता-पिता,भाई-बहन या किसी प्रियजन के साथ सोना चाहते हैं, और इस इच्छा को आसानी से कह भी देते हैं। उन्हें दैनिक क्रियाओं के सम्पादन में स्थान या स्थिति को लेकर कोई संकोच नहीं होता। वे किसी भी बात-विचार-स्थिति पर बेधड़क बोल देते हैं।
अपवादों का ध्यान रखना होगा।
वे किशोर हैं, यदि-
वे अपनी बात कहने से पहले औरों की बात सुनना या प्रतिक्रया देखना चाहते हैं। अपने लिए "स्पेस" खोजने या चाहने लगते हैं। उन्हें किसी के साथ सोने पर 'इरीटेशन' तो महसूस होता ही है, वे साथ वालों पर कोई न कोई प्रतिक्रया भी देना चाहते हैं।
वे युवा हैं, यदि-
उपर्युक्त बातों से सम्बंधित निर्णय स्वयं लेना चाहते हैं, और उन्हें गोपनीय भी रखना चाहते हैं। वे अपने व्यक्तित्व और छवि के प्रति सजग हो जाते हैं। वे अपने अधिकारों का संचय और कर्तव्यों का विखंडन करना चाहते हैं। वे एक स्पष्ट इकाई के रूप में बर्ताव करते हैं।

2 comments:

  1. सूक्ष्म विवेचन और मनोविज्ञान का अच्छा प्रयोग |

    सादर

    ReplyDelete

सेज गगन में चाँद की [24]

कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी। उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके ...

Lokpriy ...