Thursday, January 3, 2013

मीडिया में डाक्टर

एक डॉक्टर के पास एक मरीज़ लाया गया। कोई बड़ी बात नहीं थी, मरीज़ डॉक्टर के पास ही लाये जाते हैं। डॉक्टर ने जब रोग का पता लगाने की दृष्टि से उस से बातचीत करनी शुरू की तो डॉक्टर को यह जान कर अचम्भा हुआ कि  रोगी खुद भी एक डॉक्टर है।
इस से भी बड़ी बात तो यह थी कि  रोगी कोई छोटा-मोटा साधारण चिकित्सक नहीं था, बल्कि अपने नगर का प्रतिष्ठित और सक्रिय डॉक्टर था। अब तो बातचीत की सारी दिशा ही बदल गई। दोनों मित्र की तरह व्यवहार करने लगे। आवभगत भी की गई। चाय-पानी आया।
आखिर मेज़बान डॉक्टर मुद्दे पर आया, बोला - "आपको अपने रोग के बारे में क्या अंदेशा है? तकलीफ क्या है, और इसका कारण क्या हो सकता है? यह भी बताएं, कि  अपने रोग के निदान के लिए आपको मेरे पास चले आने की ज़रुरत क्यों आ पड़ी?"
रोगी डॉक्टर ने कहा- असल में मैं एक मशहूर मीडिया संस्थान में चिकित्सक हूँ। वहां लोग बीमार तो ज्यादा पड़ते नहीं हैं, मुझे अपना ज्यादा वक्त इनके चैनलों को देखने और इनके अखबारों को पढ़ने में ही बिताना पड़ता है। ऐसा करते-करते मुझे लगा कि  मुझे हवा-पानी बदलने के लिए कुछ दिनों को कहीं बाहर जाना चाहिए, तो मैं आपके पास चला आया।
डॉक्टर ने कहा- अच्छा-अच्छा, मतलब आप मुझे अपने शहर में बुलाने का न्यौता देने आये हैं?
रोगी डॉक्टर बोला- हमारे पेशे में भी एक-दूसरे से जेलेसी की भावना होती है, फिर भी मेरा इरादा ये नहीं था।

1 comment:

Some deserving ones for...No. 1

देश जल्दी ही एक नए राष्ट्रपति का नेतृत्व पाने को है। कहना पड़ता है कि राजनैतिक दलों का आपसी वैमनस्य और कटुता असहनीय होने की हद तक गिर चुके ह...

Lokpriy ...