Sunday, September 2, 2012

ये सारा सोना लेलो, मुझे कहीं से थोड़ा सा लोहा लाकर देदो

दुनिया के किसी कौने में एक अमीर आदमी रहता था। बेहद अमीर। उसके पास कितनी दौलत थी, यह तो उसके बैंक-खाते से ही पता चल पायेगा, किन्तु उसकी दौलत इतनी ज़रूर थी कि  उसे दुनिया का एक बेहद अमीर आदमी कहा जा सके।
एक दिन उस अमीर आदमी ने अपनी संपदा के प्रबंधक को बुलाया, और कहा- मेरे पास जितना भी सोना है, वह तुम लेलो, और मुझे कहीं से थोड़ा सा लोहा लाकर देदो।
प्रबंधक संकोच से गढ़ गया। बोला- मैं आपकी संपदा का प्रबंधक हूँ, इसका उपभोक्ता नहीं, अतः मैं इतना सोना कैसे ले सकता हूँ। मेरे लिए तो वह वेतन ही पर्याप्त है, जो आप मुझे देते हैं। किन्तु क्षमा करें, मेरा वेतन इतना भी नहीं है कि  मैं उसमें से किसी को उपहार लाकर दे सकूं। पर, आप मुझे यह तो बताएं कि  आप थोड़े से लोहे का करेंगे क्या?
अमीर आदमी बोला- जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा, तब हो सकता है कि कोई तो ऐसा व्यक्ति हो जो आकर तुमसे यह जानना चाहे कि  मैं कैसा था? तब तुम मेरी कब्र खोद कर कॉफिन-बॉक्स में से मुझे निकाल कर उसे दिखा सको, इसके लिए मैं एक कुल्हाड़ी बनवा कर रख जाना चाहता हूँ।
प्रबंधक को बहुत अचम्भा हुआ, वह बोला- आपकी दूरदर्शिता बहुत महान है, किन्तु इतनी सी बात की इतनी चिंता?
अमीर आदमी ने कहा- मैंने अपने जीवन में यही सीखा है कि  साध्य को पाना चाहते हो तो साधनों को जुटाना सीखो। इसी से सफलता मिलती है। 

4 comments:

  1. kya baat he....ye to kamaal ki sikh he.....

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  2. बहुत सुन्दर...
    प्रेरक कथा......

    सादर
    अनु

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  3. प्रबंधक को बहुत अचम्भा हुआ, वह बोला- आपकी दूरदर्शिता बहुत महान है, किन्तु इतनी सी बात की इतनी चिंता?
    अमीर आदमी ने कहा- मैंने अपने जीवन में यही सीखा है कि साध्य को पाना चाहते हो तो साधनों को जुटाना सीखो। इसी से सफलता मिलती है।

    प्रेरक कथा...

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