Monday, March 31, 2014

क्या आपको अच्छा लगेगा, यदि यह खोज पूरी हो गयी?

अभी हाल ही में एक ऐसे युवक से मुलाकात हुई जिसके पास शोध करने की इच्छा तो थी, पर वह यह नहीं जानता था कि "इस" विषय पर शोध किस विषय के अंतर्गत होनी चाहिए.अर्थात उसने अपने मन में एक विषय पहले से ही चुन रखा था, जिस पर वह अनुसन्धान करना चाहता था.
मुझे अच्छा लगा. क्योंकि आजकल प्रायः विद्यार्थी यह सवाल भी मार्गदर्शक के पास ही लेकर चले आते हैं कि वे किस विषय पर काम करें?
उस लड़के के पास एक बड़ा दिलचस्प विषय था.
वह कुछ चुने हुए ऐसे लोगों की सूची बनाना चाहता था जो अपने जीवन में सफल,असफल,संघर्षरत,निराश,संतुष्ट आदि की  श्रेणी में आते हैं. इसके बाद वह गुप्त या विश्वस्त रूप से ऐसे लोगों के माता-पिता से मिलना चाहता था, और उनसे यह जानना चाहता था कि उन्होंने अपनी उस "संतान" को जन्म देते समय क्या सोचा था, अर्थात उससे क्या अपेक्षाएं थीं, उसके बारे में क्या अनुमान थे या उसे लेकर क्या विशेष बात थी !
वह लड़का सोचता था कि दुनिया में ठीक हमारे आने का "ब्लूप्रिंट" बनते समय हमारे निर्माताओं के सोच का कालांतर में उत्पाद [ हम ] पर क्या प्रभाव पड़ा, इसमें कुछ संगति या तारतम्य होना चाहिए। 
यह विषय शरीरविज्ञान- मनोविज्ञान जैसे किसी विवाद में न पड़ कर किसी न किसी घाट लगे.वैसे मेरा अनुमान है कि अपनी संतान के लिए "कम" कोई नहीं सोचता, महत्वपूर्ण यह होगा कि लोग ईमानदारी से बताएं कि वे उस समय किस मानसिक स्थिति में थे.                   

No comments:

Post a Comment

प्राथमिक उपचार है तुष्टिकरण

यदि दो बच्चे आपस में झगड़ रहे हों और उनमें से एक अपने को कमज़ोर पा कर रो पड़े तो हम उनमें फिर से बराबरी की भावना जगाने के लिए एक का तात्कालिक ...

Lokpriy ...