Tuesday, March 18, 2014

मिट्टी बोलती है?

मैं जब छोटा सा था, दुनिया के दूसरे देशों को तो क्या, अपने शहर को भी अच्छी तरह नहीं जानता था.  एक दिन स्कूल में परीक्षा के दौरान पेपर में एक पत्र लिखने के लिए आया, किन्तु टीचर ने कहा कि इसमें कहीं भी अपने शहर का वास्तविक नाम न लिख कर काल्पनिक नाम लिखना है. वे शायद हमें बोर्ड की  परीक्षा की तैयारी करवाने के उद्देश्य से ऐसा कह रहे थे, क्योंकि वहाँ अपनी पहचान छिपा कर ही परीक्षा देनी होती है.
जहाँ मेरे अन्य मित्रों ने अपने शहर के आसपास के दूसरे नगरों के नाम लिखे, मैंने न्यूयॉर्क का नाम लिख दिया.पता लगने पर कुछ मित्रों ने मुझे परीक्षा के प्रति अगंभीर कहा, तो कुछ ने मेरी कल्पना की  उड़ान पर अचरज ज़ाहिर किया.
लगभग पचास वर्ष का समय बीत गया, और संयोग देखिये, मैंने अपना ये ब्लॉग आज से पाँच वर्ष पहले न्यूयॉर्क से ही शुरू किया.
इतना ही नहीं, मैंने लगभग बचपन में ही लिखी अपनी पहली कहानी में जब एक विदेशी युवती का ज़िक्र किया तो बिना कुछ जाने उसे केलिफोर्निया से आयी हुई बताया. मैं तब यह भी ठीक से नहीं जानता था कि केलिफोर्निया कहाँ है, और कैसा है.
और आज आधी सदी बीत जाने के बाद यह बात मुझे अजूबा ही लगती है कि मेरा ब्लॉग भारत से भी ज्यादा अमेरिका में, और विशेष रूप से केलिफोर्निया में खुलता है. मुझे पढ़ने वाले सबसे ज्यादा वहीँ से आते हैं.
मुझे लगता है जैसे केलिफोर्निया की मिट्टी ने मेरे बचपन में ही मेरे अवचेतन में अपनी गंध भर दी, जैसे न्यूयॉर्क ने मेरे मानस में अपना ध्वज पचास साल पहले ही फ़हरा दिया था.सचमुच, मिट्टी बोलती है.                  

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