Friday, March 7, 2014

दिल्ली के जाले अब केरल की बंदनवार

घर चाहे छोटा सा हो, चाहे बड़ा बंगलेनुमा, रहते-रहते मैला हो ही जाता है।  और अगर घर दिल्ली जैसा हो तो मैल के छींटे पूरे देश पर पड़ते हैं। तो जब दिल्ली में भ्रष्टाचार बढ़ा तो खेल-खेल में उसका कीचड़ देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में फ़ैल गया।
लेकिन दिल्ली के लोग भी कोई कम नहीं हैं। जब गंदगी होती देखते हैं तो सफाई करना भी जानते हैं।  उन्होंने झाड़ू उठाई और झटपट आनन-फानन में सारा कचरा झाड़ फेंका।
लेकिन तकनीक का कमाल है कि री- साइक्लिंग से कचरे में से भी कुछ न कुछ काम का निकल ही आता है।लिहाजा दिल्ली की  दीवारों से उतारे गए जाले भी बंदनवार बना कर केरल की  दीवार पर चिपका दिए गए।  इस से चाहे किसी को कितनी भी घिन आये, फायदे भी खूब हुए।  गिनिये-
-दिल्ली भी साफ़ हुई , और केरल को भी दिल्ली का तोहफा मिला।
-जनता ने दगा करने वालों को सज़ा दी, पर सत्ता ने मुनाफा पहुंचाने का इनाम भी दिया।
-चुनावों के बाद जब गद्दी के लिए जोड़तोड़ करने का मौसम आएगा तो सुदूर दक्षिण में अपना भी एक दरबारी बैठा मिलेगा।
-क़ानून जब कचरा करने वालों को तलाश करने निकलेगा तो "राजमहलों" में थोड़े ही घुस पायेगा !
और अबव ऑल , ये भरोसा भी हो गया कि अंततः झाड़ू "हाथ"में ही आती है, फूलों में तो जाती नहीं !            

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