Sunday, March 16, 2014

ये हुई न बात

एक बार दरबार में अकबर ने दरबारियों से कहा- "आज मैं सभी से दस सवाल पूछूंगा, लेकिन शर्त ये है कि जो भी इनका उत्तर देना चाहे उसे कुल मिला कर बस एक शब्द ही बोलने की  इजाज़त होगी और उसी में सभी प्रश्नों का उत्तर होना चाहिए."
दरबारियों के सिर पर चिंता के बादल मँडराने लगे,किन्तु फिर भी वे सांस रोक कर सुनने लगे.
बादशाह ने कहा- "ऐसा कौन है जो सब कुछ कर सकता है?"
-"ऐसा कौन है जिससे कुछ नहीं होता?"
-"ऐसा कौन है जिसे सब पसंद करते हैं?"
-"ऐसा कौन है जिसकी सब आलोचना करते हैं?"
-"ऐसा कौन है जो सबसे गरीब है?"
-"ऐसा कौन है जिसके पास बेशुमार धन है?"
-"ऐसा कौन है जो बहुत तेज़ी से चढ़ता है?"
-"ऐसा कौन है जो तेज़ी से उतर जाता है?"
-"ऐसा कौन है जो सबको रोटी देना चाहता है?"
-"ऐसा कौन है जो खुद रोटी खाने के सबसे पैसे लेता है?"
सब सिर खुजाने लगे.सबको लगा-ये आज बादशाह को क्या हो गया है, भला इतने सारे बेतुके सवालों का जवाब कोई एक ही शब्द में कैसे दे सकता है? सन्नाटा छा गया.
बादशाह ने गर्व से बीरबल की  ओर देखा-"क्यों बीरबल , तुम भी निरुत्तर हो गए?"
बीरबल ने कहा- "हुज़ूर,जवाब तो मैं दूंगा,पर इसके लिए कुछ दिनों की  मोहलत चाहिए."
-"बोलो कितने दिनों की ?" बादशाह ने कहा.
बीरबल बोला-"बस हुज़ूर,आचार संहिता ख़त्म होने तक की"
-"मोहलत तो हम दे देंगे, लेकिन याद रखो, यदि तुम्हारे जवाब से हम खुश नहीं हुए तो कड़ी सजा मिलेगी" ! बादशाह ने कहा.         

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