Wednesday, March 20, 2013

अगले सप्ताह प्रिज्म में से गुजरेगा समय

जिसने दुनिया बनाई है, वह बड़ा रंगरेज़ है। उसकी बनाई कौन सी चीज़ कब कौन सा रंग बदल ले, कोई नहीं जानता। उसके पास न रंगों की कमी है और न उमंगों की।
चमकीला सफ़ेद प्रकाश चलते-चलते जब किसी प्रिज्म में से गुजरता है तो यकायक उसमें से कई रंगों की शाखाएं निकल पड़ती हैं। इस अद्भुत नज़ारे को देख कर सब यही सोचते हैं कि यह रंगीनियाँ अब तक कहाँ  छिपी थीं। लाल, नीले, पीले, हरे, गुलाबी, नारंगी, बैंगनी रंगों की यह छटा सब का मन मोह लेती है।
सोचिये, यह मनभावन रंग जब तन-बदन पर छिटके हों, तो सारा नज़ारा कैसा लगेगा? जिसे आप चाहते हों, जिसे कल्पनाओं और सपनों में देखते हों, वह यदि इस तरह रंगों से रंगकर आपके सामने चला आये, तो ? आकर इन हलके-गहरे रंगों की हलकी सी बौछार आप पर भी छलका दे तो?
इन सब नजारों के लिए तैयार हो जाइये, अब।
बस, एक सप्ताह बाकी है, आपके और होली के बीच में। अग्रिम शुभकामनायें।

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