Friday, March 1, 2013

बीस साल बाद हमारे सारे कष्ट दूर हो जायेंगे

शीर्षक पढ़ कर आप सोच रहे होंगे कि  मैंने कितनी सकारात्मक और आशावादी बात कह दी।पर वस्तुतः ऐसा नहीं है, मैं हमेशा की तरह उलटबासी से आपको कष्टों के बारे में ही कह रहा हूँ। यह चिंतित होकर कही जा रही चिंता की ही बात है।
आज हमें लगता है कि  सब कुछ तेज़ी से बदल रहा है, और हम अपने मूल्यों को खोते हुए देख रहे हैं।
मैं कहना तो यही चाह रहा हूँ, कि  कुछ वर्ष बाद हमारे मूल्य ऐसे रहेंगे ही नहीं कि  जिनके खोने का हमें दुःख हो। जब हम अपने को गिरता देखेंगे ही नहीं, तो दुःख भी क्यों होगा? और इस तरह हमारे दुःख या कष्ट दूर हो जायेंगे।
लेकिन अब मुझे समझ में आ रहा है कि  यह भी तो एक तरह का कष्ट ही है, जो हम इस तरह रसातल में पहुँच जाएँ, कि  और गिरने की गुंजाइश ही न रहे।
नही-नहीं, मुझे यह भी यकीन है कि  हमारी नई पीढ़ी कुछ न कुछ ऐसा ज़रूर सोचेगी, जो हमें कष्टों में नहीं पड़ने देगा। गली-मोहल्लों में खेलते बच्चे, कितने अलग और समझदार होते जा रहे हैं, कि  हर बात का कोई न कोई हल हर समय रहेगा।
मैं जब किसी बहुत छोटे बच्चे को देखता हूँ तो मुझे लगता है कि  जब यह बीस साल का होगा तो कितना ज्यादा सीख चुका होगा?  हम जो बातें बरसों में सीख पाए, वे ये बच्चे लम्हों में सीख रहे हैं। और तब सचमुच मुझे लगता है कि  बीस साल बाद हमारे सारे कष्ट दूर हो जायेंगे।     

4 comments:

  1. बहुत ठीक कहा आपने . हमें नयी पीढ़ी पर विश्वास रखना होगा .

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