Sunday, August 17, 2014

कबड्डी-कबड्डी-कबड्डी

अच्छा लगता है कबड्डी जैसे खेल का लोकप्रिय होना। इस पर बड़े-बड़े लोगों का ध्यान जाना। इसके लिए सुविधाएँ जुटाने की मुहिम का शुरू होना। खिलाड़ियों को मान-सम्मान और धन मिलना, मीडिया में उनका रंग उड़ना।
क्या आप जानते हैं-
क्रिकेट जैसे खेल में एक टीम के बल्ले और दूसरी टीम की गेंद के बीच जंग होती है। बैडमिंटन या टेनिस जैसे खेल में दोनों ओर के बल्ले एक गेंद या शटल कॉक पर प्रहार करते हैं। फ़ुटबाल में दोनों दल एक बॉल के लिए झगड़ते हैं। बास्केटबॉल, हॉकी में भी निर्धारित स्थान तक बॉल का सफर होता है।  शतरंज में दो दिमाग झगड़ने के लिए मोहरों का सहारा लेते हैं, लेकिन कबड्डी जैसे खेलों में खिलाड़ियों के शरीर हारजीत का फैसला करते हैं।
इस तरह कुश्ती, मुक्केबाजी,तैराकी और कबड्डी केवल बदन के खेल हैं।
यहाँ भी कुश्ती-मुक्केबाजी में एक दूसरे के शरीर को परे हटाया जाता है, तैराकी में पानी में अकेले रहते हुए पानी को हटाया जाता है, किन्तु कबड्डी में विपक्षी के बदन को अपनी ओर खींच कर रोका जाता है। तो हुआ या नहीं ये प्यार-भरा खेल? ये खेल बढ़ा तो मोहब्बत का सन्देश ही देगा।  चाहे दो शख़्स हों, दो दल हों, दो समाज हों, या दो देश !      
           

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