Tuesday, August 19, 2014

इतिहास क्यों पढ़ते हैं लोग?

कुछ दिन पहले भ्रमण पर जाते एक ग्रुप को शुभकामनायें देते-देते मेरे मुंह से सहसा निकल गया- "वहां की कुछ अच्छी पिक्चर्स लाना।"  बी.एस सी. प्रथम वर्ष में पढ़ने वाली, मेरे मित्र की सुपुत्री ने एक पल अजीब सी नज़र से देखा- मानो, वह मेरी कही बात को समझने की कोशिश कर रही हो। मुझे भी लगा कि शायद वह मेरी बात समझ नहीं पाई।  तभी एकाएक वह बोली- "ओह पिक्स? ज़रूर अंकल !"
वे लोग तो चले गए, किन्तु मुझे बैठे-बैठे याद आया, कि कुछ वर्ष पहले बच्चे ये जानते थे कि पिक्चर एक शब्द है और पिक्स उसका संक्षेप।
मुझे ठीक से याद है , उससे कुछ और पहले के बच्चे अच्छी तरह जानते थे कि फोटो, तस्वीर, चित्र, पिक्चर सब एक ही हैं।
तो अपनी याददाश्त की टॉर्च को इतिहास की ओर फेंकिए, कभी-कभी जितना पीछे जाते जायेंगे, लगेगा जैसे उजाला बढ़ रहा है।
लेकिन ये सब एकदम चुपचाप कीजियेगा,  गली ने नुक्कड़ पर जाने के लिए स्कूटी निकालते किसी बच्चे से ये मत कहियेगा कि आपके दादाजी, दो घंटे में पांच मील पैदल चल लेते थे।  वह आप को यह कह कर फ़ौरन नीचा दिखा देगा कि "अंकल,मैं तो दो घंटे में मुंबई से अहमदाबाद चला जाऊंगा, बुलेट ट्रेन आने दीजिये !"और शायद आप सोचते रह जाएँ कि इसके लिए इसके पिता को कितना पैसा छोड़ना चाहिए? तिलिस्मी भविष्य में "घुटना बदलना" कोई बच्चों का खेल थोड़े ही रह जायेगा? अलबत्ता,ये भी हो सकता है कि तब हस्पतालों के प्रवेश द्वार पर बोर्ड लगे हों-"इट्स फ्री"      

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