Wednesday, October 22, 2014

प्रकाश-विनिमय

प्रकाश विनिमय बड़ी कठिन प्रक्रिया है। प्रकाश यदि किसी को दिया जाए,तो यह जाता नहीं है। यह वहीँ रहते हुए अपना दायरा बढ़ा लेता है।ऐसे में प्रकाश विस्तार तो संभव है किन्तु प्रकाश विनिमय नहीं। आप किसी को बल्ब तो दे सकते हैं,जिसे वह अन्यत्र ले जाकर प्रकाशित कर ले, पर रोशनी ले जाने के लिए देना जटिल प्रक्रिया है। ठीक इसी तरह प्रकाश आयात करना भी पेचीदा है। हम कहीं से लैम्प ला सकते हैं,लेकिन उजास लाना संभव नहीं होता।
यदि हज़ारों साल में एक बार कभी ऐसा हो जाए कि अपने पैरों चल कर प्रकाश, रोशनी या उजाला आपके घर के द्वार चला आये तो अद्भुत बात होती है। वस्तुतः यही दीवाली होती है।इस दिन आसुरी शक्तियों का संहार करता भटक रहा आपका राम आपके पास वापस लौटता है। यह उजाला आने की प्रक्रिया होती है, जो सदियों में एक बार कभी होती है।
राम के लौट आने का अर्थ यह नहीं होता कि  दुनिया से आसुरी और मैली शक्तियाँ अब समाप्त हो गयीं, इनका बार-बार सिर उठाते रहना तय है। इसीलिये राम के आगमन पर बधाई से अधिक "शुभकामनाओं"का महत्व है। "उजाले संभाल कर रखिये, अँधेरे मरते नहीं, सोये होते हैं, आपको रोशनी की दरकार हमेशा रहती है"                  

6 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (24.10.2014) को "शुभ दीपावली" (चर्चा अंक-1776)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है। दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  2. दीपावली पर आपको हार्दिक बधाई व शुभकामनायें!

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  3. बहुत सुन्दर।
    प्रकाशोत्सव के महा पर्व दीपावली की शृंखला में
    पंच पर्वों की आपको शुभकामनाएँ।

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  4. Aap teenon ka hardik aabhaar! Deepotsav ki anek mangalkamnayen!

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  5. Sunder aalekh.... Diwali ki shubhkamnayein aapko

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