Thursday, December 31, 2015

सत्य, शिव और सुन्दर !

कहते हैं कि किसी के अंत समय में उसके बारे में केवल अच्छा ही बोला जाना चाहिए। लेकिन कहा यह भी जाता है कि किसी के जाते वक़्त उसके कानों में केवल सत्य का रस ही घोला जाना चाहिए। कई ऐसी बातें जो ज़िंदगी भर राज रहती हैं, किसी के अंतिम समय में ज़ाहिर कर देने का भी अपना ही सुख है।  ये पुण्य भी कहा जाता है। तो अब कुछ ऐसा कहना ज़रूरी है जो सत्य भी हो, शिव भी और सुन्दर भी।
तो सबसे अच्छी बात ये, कि चंद पलों में हमारे हाथ से छूट जाने वाले इस साल के बदले में जो साल हमें मिलने वाला है, वह इससे भी बड़ा है।  इसमें पूरे चौबीस घंटे ज़्यादा हैं।
दूसरी बात ये कि इसी साल के आगमन के साथ हमारी मौजूदा सदी सोलहवें साल में कदम रख रही है। किसी महिला के लिए सोलहवें साल की अहमियत क्या होती है, ये बताने की ज़रूरत नहीं है।  बहरहाल ये ज़रूर बताना पड़ेगा कि इसकी गोद में पुरुष रूपी लम्हे,पल, दिन, महीने, वर्ष कितने भी हों, सदी या शताब्दी महिला है।
शुक्र है कि नया साल शुक्रवार से ही आरम्भ हो रहा है।
और अंत में सबसे अच्छी बात ये, कि ये आनेवाला साल बिलकुल नया है, ये सच में पहले कभी नहीं आया।
एक ऐसे साल के लिए आपको बधाई और शुभकामनायें !
       

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