Tuesday, September 16, 2014

फेसबुक पर

कल "इंजीनियर्स डे" था, दुनिया को तकनीक के सहारे ऊंचा उठाने वालों के नाम।  ओह,जाने ये कैसे लोग हैं जिन्होंने दुनिया को बदल दिया, लोगों की ज़िंदगी को बदल दिया। सतत चिंतन और कर्म से कहाँ से कहाँ ले गए  बातों को।
समुद्र में उफनते लहराते पानी को कैद करके पाइपों के सहारे हमारे घरों के भीतर भेज दिया।  सूरज डूबने के बाद घिरी अँधेरी उदासी को चकाचौंध जगमगाती रोशनी में बदल दिया। सीढ़ी दर सीढ़ी हमारे घरों को आसमानों तक ले गए। दुनिया के एक सिरे से दूसरे सिरे तक इंसान को उड़ाते ले जाने लगे। लोहे-इस्पात से आदमी के इशारे पर नाचने वाले आज्ञाकारी सेवक गढ़ दिए। ज़मीन के भीतर से बेशकीमती नगीने निकाल-निकाल कर इंसानी काया को सजा दिया। 'असंभव' नाम के लफ्ज़ का तो जैसे नामो-निशान मिटाने पर तुल गए।
मुझे तो लगता है कि एक न एक दिन इनकी पकड़ 'जीवन-मृत्यु' के चक्र से निकल कर जन्म-जन्मान्तरों पर हो जाएगी।
सच, कितना मज़ा आएगा ?
तब हमारे मित्र गण आसानी से "फेसबुक" पर [फोटो सहित] बता पाएंगे कि वे इंसान बनने से पहले की चौरासी लाख योनियों में से अभी कौन सी योनि में हैं।                  

No comments:

Post a Comment

सेज गगन में चाँद की [24]

कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी। उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके ...

Lokpriy ...