प्रकाशित पुस्तकें
उपन्यास: देहाश्रम का मनजोगी, बेस्वाद मांस का टुकड़ा, वंश, रेत होते रिश्ते, आखेट महल, जल तू जलाल तू
कहानी संग्रह: अन्त्यास्त, मेरी सौ लघुकथाएं, सत्ताघर की कंदराएं, थोड़ी देर और ठहर
नाटक: मेरी ज़िन्दगी लौटा दे, अजबनार्सिस डॉट कॉम
कविता संग्रह: रक्कासा सी नाचे दिल्ली, शेयर खाता खोल सजनिया , उगती प्यास दिवंगत पानी
बाल साहित्य: उगते नहीं उजाले
संस्मरण: रस्ते में हो गयी शाम,
Thursday, January 27, 2011
तैरने का अहसास
हम पानी में तैरते हैं.पानी में तैरते समय केवल पानी दिखाई देता है.कभी कभी बहुत करीब की काई या कीट भी। पानी में तैरते समय भौतिक शास्त्र के कुछ सिद्धांत या रसायन शास्त्र की कुछ क्रियाएं भी हमारे इर्द गिर्द चलते हैं.किन्तु एक तैराकी हवा में भी होती है। इस तैराकी में हमारी आँखों के आगे इतना कुछ आता है कि आँखें उसे समेट भी नहीं पातीं। मस्तिष्क बौना सा खड़ा रह जाता है और दुनिया परत दर परत खुलती जाती है। इस तैराकी में दिमाग पल पल समृद्ध होता जाता है। चारों ओर के रंग बढ़ते जाते हैं।इस तैराकी के दौरान हमारे साथ साथ एक हंस चलता है.एक वीणा होती है जो एक स्त्री के हाथों में होती है.यह स्त्री द्रश्य अद्रश्य रूप में जब तक हमारे साथ होती है हम पल -पल धनवान होते जाते हैं। जब यह साथ नहीं होती हम रास्ता भटक जाते हैं। ज़माने भर की हवा में तैरते हुए भी हम निर्धन रह जाते हैं। यही स्त्री हमें धन की असली परिभाषा भी सिखाती है। इस स्त्री के दिए मोती -माणिक हम पहचान पायें तो जीवन सार्थक हो जाता है। इस स्त्री को सादर नमन, इसकी महिमा को नमन।
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शोध
आपको क्या लगता है? शोध शुरू करके उसे लगातार झटपट पूरी कर देने पर नतीजे ज़्यादा प्रामाणिक आते हैं या फिर उसे रुक- रुक कर बरसों तक चलाने पर ही...
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