Sunday, December 21, 2014

कोई है?

अपने देश "भारत" के बारे में एक बात मुझे हमेशा बड़ी उदास करने वाली लगती रही है।यहाँ की शिक्षा प्रणाली में 'कैरियर'चुनने की कोई माकूल प्रविधि नहीं है।  हर बड़े होते बच्चे को अपने सपने और ज़मीनी हकीकत की दो पतवारें लेकर भविष्य बनाने की नाव खेनी पड़ती है। सपने पोसने का कहीं प्रावधान नहीं है।बच्चा थोड़ा सा बड़ा हुआ नहीं कि उसकी पीठ पर माता-पिता, अभिभावकों के सपने लदने लगते हैं।  पैरों में आर्थिक परिस्थिति की बेड़ियां पड़ने लगती हैं।राह में भ्रष्टाचार और पक्षपात के कंटीले झाड़ उगने लगते हैं।यहाँ, किसी भी बड़े से बड़े कलाकार,खिलाड़ी या लेखक की जीवनी में ये पढ़ने को मिल जाता है कि मेरे घरवाले मुझे डॉक्टर ,इंजीनियर, अफसर आदि बनाना चाहते थे किन्तु ऐसा न हो सका।
इस बार नए साल के अपने संकल्प के लिए मैं जो बातें सोच रहा हूँ, उनमें एक यह भी है कि मैं वर्षारम्भ से ही ऐसे लोगों की तलाश करूँगा जो अपने जीवन में "लेखक" बनना चाहते हैं। जाहिर है कि यह जानना सरल नहीं है। फिरभी, यदि आपकी निगाह में कोई ऐसा है, या फिर ऐसे लोगों की तलाश करने का कोई सुगम तरीका है, तो कृपया मुझे बता कर मेरी मदद कीजिये।
जिस तरह हम बाजार से बिना कीड़ा लगी सब्ज़ी छाँटने की कोशिश करते हैं, उसी तरह कोई ऐसा लेखक जिसके दिमाग में ज़िंदगी में कभी भी लेखक बनने के अलावा विकल्प के रूप में और कोई ख़्वाब न आया हो! कोई है?              

5 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के - चर्चा मंच पर ।।

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  2. पर लेखक भविष्‍य की सोच के कहां बना जाता है? यह तो निर्धारित समाज के समानांतर चलनेवाला एक दार्शनिक कर्म होता है। यह अलग बात है कि सरकारी दखल से लेखन व लेखक को पुरस्‍कार और अहंकार के लिए उकसाया जाता रहा है।

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  3. Aap donon ka Dhanyawad! Vikeshji, yahi baat to mujhe khatakti hai ki apne yahan "Lekhak ban jate hain",banne ki sochte nahi.Aabhaar.

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