Sunday, January 26, 2014

पद्म पुरस्कारों पर टीका-टिप्पणी ?

गणतंत्र दिवस पर भारत में हमेशा की तरह ही "पद्म पुरस्कारों"की  घोषणा हो चुकी है . और हमेशा की  तरह ही इन पर सहमति-असहमति के स्वर भी मुखर हो गए हैं .
ये पुरस्कार पाने वाले लगभग सभी ऐसे लोग हैं जो वर्षों से अपने-अपने क्षेत्र में तन्मय होकर काम कर रहे हैं . इनकी उपलब्धियां भी जग-ज़ाहिर हैं .फिर भी केवल इन कारणों से इन पर छींटाकशी होती है-
१. पुरस्कृत होने वालों के साथ-साथ कुछ ऐसे और समकक्ष लोग भी हैं जो पुरस्कृत होने से रह गए हैं.[ लेकिन इसके लिए सम्मानित होने वाले लोग कहाँ दोषी हैं जो हम इनके नाम पर अंगुली उठायें?]
२. पुरस्कार पाने वाले और पुरस्कार देने वाले किसी न किसी राजनैतिक दल से सम्बद्धता रखते हैं, इसी कारण अन्य दल के समर्थन की  मानसिकता रखने वाले उनकी योग्यता को नज़रअंदाज़ करते हैं  [विडम्बना यह है कि किसी भी दल के प्रति आग्रही न होने वाले लोगों का चयन व मूल्यांकन कौन करे?]
३. पुरस्कारों की  सम्पूर्ण चयन-प्रक्रिया में पारदर्शिता की  कुछ कमी है . [इसके लिए चयन समिति को स्वायत्त और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए, जो किसी भी नाम पर विवाद की  स्थिति में स्वयं स्पष्टीकरण देने में समर्थ हो]
सभी सम्मानित होने वाले साधकों व विजेताओं को हार्दिक बधाई !  

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