Friday, January 24, 2014

वह कौन था?

एक बार एक बहुत ही मशहूर लेखक किसी पार्क में घूमने गया. भीतर दाखिल होते ही वह यह देख कर चकित हो गया कि पार्क के भीतर जितने भी लोग थे, वे सभी उसकी किसी न किसी रचना के पात्र थे.कोई घूम रहा था, कोई खेल रहा था, कोई खा रहा था, कोई रो रहा था,कोई हंस रहा था तो कोई किसी के इंतज़ार में बैठा था.
लेखक बदहवास होकर इधर-उधर देखने लगा. पर वहाँ ऐसा कोई नहीं था जो उसे ये बता सके कि ये सब यहाँ कब आये, कैसे आये और क्यूँ आये.
लेखक वहाँ घूम रहे लोगों से भी इस बाबत कुछ पूछना नहीं चाहता था, क्योंकि वह जिससे भी बात करता, वही उसका सबसे प्रिय पात्र मान लिए जाने का खतरा था, जबकि खुद लेखक के हिसाब से उसका सबसे प्रिय पात्र अभी रचा जाना शेष था.
आखिर और कोई चारा न देख, लेखक पार्क के एक कौने में बैठ गया और झटपट अपनी एक नई रचना पर काम करने लगा.
कई दिन बीत गए. लेखक भूख-प्यास सब भूल कर तल्लीनता से लिखता रहा. जब रचना पूरी करके लेखक ने ऊपर सिर उठाया तो वह ये देख कर भौंचक्का रह गया कि अब पार्क में दूर-दूर तक कहीं कोई नहीं था.लेखक अनमना होकर उठा, और अपनी पाण्डुलिपि बगल में दबाये चुपचाप वहाँ से अपने घर की  ओर चल दिया.
क्या आप बता सकते हैं कि वह पाण्डुलिपि किस लेखक की "आत्मकथा" थी?           

2 comments:

  1. याद तो पड़ रहा है पर भूल भारी हो गई है।

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  2. Chaliye,Jab yaad pad hi raha hai to thoda waqt aur leejiye!

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