Wednesday, February 17, 2016

खलनायक नहीं है कास्टिंग काउच [ 2 ]

फिल्म निर्माण करोड़ों रूपये का खेल है।  ऐसे में लेखक / निर्देशक / निर्माता / फाइनेंसर सभी की आशाओं पर खरा उतरने का काम एक कलाकार को करना पड़ता है।  उस कलाकार को जो व्यक्ति या एजेंसी आपके पास लेकर आये , उसे भी पूरा हक़ है कि वह उसकी विशेषताओं, योग्यताओं, सीमाओं की पूरी जानकारी रखे।बल्कि यह उसका कर्त्तव्य है, क्योंकि सही काम के लिए सही समय पर सही व्यक्ति देना उनके व्यवसाय का हिस्सा है। उन्हें इसी का पैसा मिलता है।
आप कहेंगे कि बॉलीवुड का सेंसरबोर्ड तो सम्भोग दृश्यों को पास नहीं करता तो ऐसे में कलाकार से कोई पहले ऐसी अपेक्षा क्यों रखे कि वह सेक्स में लिप्त हो ?
ये जानिये-
चाहें फिल्म में यौन संसर्ग के सीधे दृश्य दिखाए न जाते हों, अंतरंग दृश्यों की शूटिंग अवश्य होती है,और बाद में संपादन से इनका वांछित व अनुज्ञा-प्राप्त भाग ले लिया जाता है। इस से कलाकारों के अभिनय और लुक्स में स्वाभाविकता आती है। कई बार प्रेक्टिस या रिहर्सल में खुले तौर पर आपका सहयोग मिलने से आपके और साथी कलाकार के दृश्य भी जीवंत बन पाते हैं।
ये सत्य है कि यदि कलाकार वास्तविक जीवन में रूढ़िवादी या नैतिकता को लेकर संकुचित सोच वाला होगा तो वह कितना भी अभिनय-प्रवण हो, अंतरंग संबंधों में स्वाभाविकता नहीं ला पायेगा [ अपवाद हो सकते हैं] और अंतरंगता फिल्म की जान होती है। कई बार कलाकारों की 'केमिस्ट्री' साधारण फिल्म को भी असरदार बना ले जाती है। कलाकार फिल्म को जीवंत बना ले जाने के लिए कितनी मेहनत करते हैं, वजन घटाते-बढ़ाते हैं, प्रशिक्षण लेते हैं, नृत्य, ड्राइविंग,स्वीमिंग या फाइट सीखते हैं, तो केवल इस एक पक्ष के लिए दकियानूसी कैसे हो सकते हैं? शराब नोशी की भूमिका करने से पहले यदि एकाध बार पी कर देख लें, तो इसमें क्या हर्ज़ है ?
हो सकता है कि आयुष्मान खुराना का वास्ता किसी कास्टिंग काउच से इसीलिए पड़ा हो कि उन्हें भविष्य में 'विकी डोनर' जैसी फिल्म करनी थी।
आइटम नंबर के लिए किसी मल्लिका शेरावत, राखी सावंत,सनी लियॉन जैसी अभिनेत्री की सिफारिश करने वाले कास्टिंग डायरेक्टर को उनकी स्ट्रेंथ पता तो होनी चाहिए !
[... जारी ]
 
    

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