उड़ान और सामाजिकता का संबंध बेहद दिलचस्प है। आप जितना ऊपर उड़ते जाते हैं समाज नीचे उतना ही आपसे दूर होता जाता है। ये बात शायद उस परिंदे के जेहन में नहीं आती तो परवाज़ के लिए पर तौल रहा होता है।
इस विलोमानुपाती संबंध की सबसे खूबसूरत बात यही है कि जिस पल आप थकते हैं और आपके पंख अब उड़ान से तौबा करने लगते हैं आप छटपटा कर नीचे की ओर ही आते हैं, जहां समाज आपको फ़िर मिल जाता है।
मैं जानता हूं कि ऐसा होता है फिर भी मुझे उड़ना अच्छा लगता है।
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