अमेरिका के पब्लिक सिस्टम भावुकता या छिपे आतंरिक व्यव्हार से ग्रसित नहीं हैं। शायद इसीसे उनकी विश्वसनीयता न केवल निर्मित बल्कि निरंतर है। एक बार मैंने अपने एक अधीनस्थ कर्मचारी को उसका माँगा गया लोन देने से इंकार कर दिया, जाहिर है इसका कारण यही था की वह नियमानुकूल नहीं था। यथासंभव यह बात मैंने उसे समझाने की चेष्टा भी की। किन्तु जब हम किसी आवश्यकता में होते हैं तो हमारा चीजों को देखने-समझने का नजरिया भी प्रभावित हो जाता है। व्यक्ति दिन भर असंतुष्ट बना रहा। उसी शाम मेरे ही समकक्ष एक अन्य अधिकारी के घर पर कोई धार्मिक उत्सव आयोजित था। हम सभी वहां गए। वह अधीनस्थ कर्मचारी उनके घर के उत्सव में बढ़-चढ़ कर काम में हाथ बटा रहा था। कुछ देर बाद वह ट्रे हाथ में लेकर सभी आगंतुकों को पानी पिलाने आया। वह सभी को आदर से पानी देता हुआ मेरे सामने से तेज़ी से गुज़र गया। मुझे वैसे भी ज्यादा प्यास नहीं थी, पर जो थी वह भी उसके व्यवहार से समाप्त हो गयी। कार्यक्रम समाप्त हो जाने के बाद एक बार फिर ऐसा ही हुआ। वह सभी को प्रसाद बाँटने में मदद कर रहा था। जब मेरा नंबर आया तो वह इधर-उधर बांटता हुआ देर तक मुझे देने से बचता रहा। किन्तु मेज़बान अधिकारी के पास ही खड़े होने और मुझसे अभिवादन करने के बाद उसे बेमन से मुझे भी देना ही पड़ा। लौटते समय में सोच रहा था की यदि मेरी जगह भी उसी मानसिकता का कोई व्यक्ति रहा होता तो बेचारे अधिकारी महाशय के धार्मिक अनुष्ठान से किसे पाप और किसे पुण्य मिलता? मानव व्यवहार की यह छोटी-छोटी बातें सामूहिक कार्य क्षमता को भी प्रभावित करती हैं और भारत में शैक्षणिक पिछड़ेपन के कारन अस्वाभाविक परिणाम भी देती हैं। सम्पन्न देशों में ऐसा कम होता होगा।
प्रकाशित पुस्तकें
उपन्यास: देहाश्रम का मनजोगी, बेस्वाद मांस का टुकड़ा, वंश, रेत होते रिश्ते, आखेट महल, जल तू जलाल तू
कहानी संग्रह: अन्त्यास्त, मेरी सौ लघुकथाएं, सत्ताघर की कंदराएं, थोड़ी देर और ठहर
नाटक: मेरी ज़िन्दगी लौटा दे, अजबनार्सिस डॉट कॉम
कविता संग्रह: रक्कासा सी नाचे दिल्ली, शेयर खाता खोल सजनिया , उगती प्यास दिवंगत पानी
बाल साहित्य: उगते नहीं उजाले
संस्मरण: रस्ते में हो गयी शाम,
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