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Sunday, September 2, 2012

600 वीं पोस्ट "मंटू कुमार" के नाम

आज मेरी इस पोस्ट पर 600 पल पुराना सफ़र आपके साथ पूरा हो रहा है।इस लम्बे सफ़र में कभी-कभी मुझे बहुत अकेला हो जाना पड़ा। इसका एक कारण यह था कि मैंने बीच में अपनी कुछ लंबी कहानियाँ,एक उपन्यास  और कुछ अन्य लंबी रचनाएँ ब्लॉग पर परोस दी ।नतीज़ा यह हुआ कि मेरे मित्रों और शुभचिंतकों ने ब्लॉग पर झाँकना कुछ कम कर दिया ।मै इसे समेटकर बंद करने की सोचने ही लगा था कि मंटू कुमार के ब्लॉग "मन के कोने से" पर मेरा ध्यान गया ।मैंने कुछ टिप्पणियाँ भी की ।इसका परिणाम यह हुआ कि इस युवा ब्लॉग लेखक की प्रतिक्रिया भी मुझे मिलने लगी ।और मुझे लगा जैसे बातों का सिलसिला फिर से चल निकला हो ।अब मेरे मन के कोने से यह आवाज आ रही है कि मै यह सिलसिला 1000 पोस्ट तक बंद न करूँ ।मै इसके लिए मंटू को धन्यवाद देता हूँ ।
अब मै एक आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी का समाचार भी आपको दे रहा हूँ ।आज मंटू मुझसे मिलने मेरे पास आया है और इससे भी बड़ी ख़ुशी इस बात की है कि मेरे इस झरोखे से मंटू कुमार ही बात कर रहा है ।
मंटू कुमार- अब कहने के लिए कुछ बचा ही नही,बस दो लफ्ज- "इनकी नज़र में मेरे वजूद के एहसास ने जीने की तमन्ना को और बढ़ा दिया है ।" दो दिन पहले अंकल ने उन लोगों के लिए एक संदेश दिया था जिनका उस दिन जन्मदिन है ।मैंने सोचा कि शायद अंकल का ही आज जन्मदिन हो ।इसलिए मै बधाई देने के वास्ते उनके पास चला आया ।यहाँ आकर मुझे पता चला कि उनका जन्मदिन 11 जुलाई को आता है ।यह संदेश उन्होंने सभी के लिए दिया था ।    

Friday, May 25, 2012

आपसे  बातचीत  के 500 लम्हे ...अर्थात  पांच  सौवीं  पोस्ट ...उन  सभी  को  धन्यवाद  जिन्होंने  इस  ब्लॉग  के  झरोखे  से  कभी  न  कभी  झाँक  कर   मेरी हौसला-अफज़ाई  की ...

Monday, September 19, 2011

३०० पोस्ट पूरी: ये तिहरा शतक "स्मार्ट इंडियन", डॉ.अजित गुप्ता और गिरिजेश कुमार के नाम

एक बार अंक आपस में लड़ पड़े. नौ ने कहा-इंसान नौ माह माँ के पेट में रह कर धरती पर आता है.दो बोला-सारे ज़रूरी अंग दो हैं, आँखें,कान,हाथ,पैर...पांच से चुप न रहा गया-संतुलित रहना है तो अंगुलियाँ पांच चाहिए.चार को चारों दिशाओं से समर्थन मिल रहा था.एक ने कहा-नंबर वन की बात ही निराली है.उधर छह सबको छठी का दूध याद दिलाने को ललकार रहा था.
तभी शून्य की आवाज़ आई-लड़ लो, तुममे से कोई नहीं जीतने वाला.मुझे अपने सर पर बैठाओ, फिर देखो तुम्हारी महिमा.सब चुप हो गए.
आज तीन ने एक नहीं,बल्कि दो-दो शून्य सर पर बैठा लिए हैं.अर्थात पूरे ३००
मुझे इस सफ़र में मिले तीन लोग याद आ रहे हैं.
डॉ.अजित गुप्ता जब राजस्थान साहित्य अकादमी की अध्यक्ष थीं,चाहते हुए भी उनसे कभी मिलना न हो पाया.जब अमेरिका से लौटा तो सोचा था,उनके सहयोग से एक पत्रिका निकालने की योजना पर काम करूंगा.पर आने के बाद कुछ और प्रस्तावों से जुड़ना पड़ा,और पत्रिका की बात किनारे रह गई.
ब्लॉग पर ही गिरिजेश कुमार से जुड़ा.मुझे अपने वे दिन याद आ गए, जब मैं भारतीय विद्या भवन,मुंबई में पत्रकारिता का छात्र था.पटना में पत्रकारिता के छात्र गिरिजेश की चीज़ों को तेज़ी से समझने की क्षमता ने मुझे हमेशा प्रभावित किया.इसका सुनहरा भविष्य भारतीय पत्रकारिता में सुनिश्चित है.
"स्मार्ट इंडियन" हमेशा मुझे अमेरिका में किसी भारतीय द्वीप की तरह दिखाई देते रहे.भारतीय मानसिकता की नर्सरी से जैसे कोई पौधा विश्व के श्रेष्ठतम देश के दालान में रोपा गया हो,जिसे हवा पानी धूप छाँव कहीं की भी मिले, फितरत अपनी मौलिक है.बच्चे भी मेरे आलेखों को उनकी टिप्पणी के आधार पर ही आंकने लगे हैं.'अंकल' का कमेन्ट आया है, अर्थात पोस्ट अच्छी है.
इन तीन नामों के उल्लेख का यह अर्थ न निकालें, कि मुझे अपने बाक़ी पढने वालों से कोई सरोकार नहीं है-राहुल,रवीन्द्र रवि,सुमित स्मार्टी,राजेश कुमारी जी,अंकित,विवेक जी,शुक्ल जी,मनोज जी,श्रीवास्तव जी,डॉ.राजेश,सुरेन्द्र सिंह जी,राकेश कुमार जी,ज़ील और पॉपकोर्न तो मेरे मन में हैं ही.

Saturday, June 25, 2011

२०० वाँ पड़ाव- "लोग पत्थर फेंकते हैं "

एक नन्हे से पिल्ले ने,जिसने अभी कुछ महीने पहले ही दुनिया देखी थी,अपनी माँ से जाकर कहा-"लोग पत्थर फेंकते हैं". 
कुतिया क्रोध से तमतमा गई. बोली- उन्हें मेरे सामने आने दे, तेज़ दांतों से काट कर पैर चीर कर रख दूँगी. तू वहां मत जा, यहीं खेल. वे होते ही शरारती हैं. 
पिल्ला अचम्भे से बोला- ओह माँ, तुम कैसे सोचती हो? मैं तो गली के नुक्कड़ पर घूमने गया था. वहां मजदूर लड़के ट्रक से पत्थर खाली कर रहे हैं. वे पत्थर उठा-उठा कर नीचे सड़क पर फेंकते हैं. मैं तो खड़ा-खड़ा उनका पसीना देख रहा था. अब हमारी सड़क भी पक्की बन जाएगी. 
कुतिया ने इधर-उधर देखा और झुक कर पैर से कान खुजाने लगी. 
["पाज़िटिव थिंकिंग" या सकारात्मक चिंतन का संकेत करती यह 'लघुकथा' आपसे मेरी बातचीत की २००वी कड़ी है. मैं लगातार साथ चलने के लिए आपको बधाई देता हूँ और आगे के रास्ते के लिए खुद को हौसला भी देता हूँ.]       

Saturday, March 5, 2011

100post पूरी

आपको बधाई कि आपने मेरी १०० बातें सुनलीं। अब कुछ ठहर कर...

मैं जानता हूं कि...

 उड़ान और सामाजिकता का संबंध बेहद दिलचस्प है। आप जितना ऊपर उड़ते जाते हैं समाज नीचे उतना ही आपसे दूर होता जाता है। ये बात शायद उस परिंदे के ...

Lokpriy ...