पिछले दिनों पढ़ने में आया कि अमेरिका में वाशिंगटन में एक समूह से पूछा गया कि २०८८ में दुनिया में जन-जीवन कैसा होगा। लोगों ने बड़े दिलचस्प उत्तर दिए। ज़्यादातर उत्तरों में यही संकेत था कि लोग जो कुछ अभी हो रहा है, उसे और शिद्दत से जीने को लालायित होंगे। लोगों ने जवाब देते समय कल्पना का सहारा कम लिया, किन्तु संवेगों के बढ़ने को ज्यादा तरजीह दी। मुझे तो यही लगता रहा- कि काश मैं भी इस वक्त वाशिंगटन में होता और सवाल पूछने वालों से मुखातिब हो पाता।
यदि मुझे इस सवाल का जवाब देने का अवसर मिलता तो मेरा उत्तर दो भागों में बंटा हुआ होता। पहले तो मैं कल्पना के सहारे बताता कि २०८८ कैसा होगा, फिर मैं यह भी बताता कि उसे कैसा होना चाहिए।
मुझे लगता है कि २०८८ तक आते-आते प्राणिजगत के कम से कम कुछ जीव मनुष्य पर ' डोमिनेट ' करने लग जायेंगे।उनमे से कुछ तो हमारी तरह बोलने लग जायेंगे। ऐसी सम्भावना बहुत है कि जो जीव ' पेट ' के रूप में हमारे साथ रहते आये हैं वे ऐसा कौशल ज़रूर हासिल कर लेंगे।हाँ, इसमें कोई शक नहीं कि वे ऐसी दक्षता हमारे सहयोग से ही प्राप्त करेंगे। कुछ तो अभी डोमिनेट करते ही हैं। वे हमसे ज्यादा ताकतवर हैं, ज्यादा तेज़ दौड़ते हैं, उड़ सकते हैं, पानी और हवा में हम से ज्यादा दूर तक देख सकते हैं। बस, जब वे बोलने लग जायेंगे तो वे अभिमान से बढ़-चढ़ कर हम पर रोब भी ज़माने लगेंगे। अभी तो घोड़े को तेज़ भगा कर आदमी इनाम लेने खड़ा हो जाता है। शेर - हाथी जो करतब दिखाते हैं , उनकी मेहनत से पैसा आदमी बटोर ले जाता है।वे खामोश रहने को अभिशप्त हैं।
हाँ, २०८८ की दुनिया को कैसा होना चाहिए, इस पर मैं यह कहूँगा कि हमारी जनसँख्या जितनी भी हो, वह पूरे विश्व में एकसार बटी हुई होनी चाहिए। मुझे लगता है कि एक जगह पर ज्यादा लोगों का होना उनकी ताकत कम, बेबसी ज्यादा बनता है।
अविकसित देशों की एक समस्या यह भी है।
प्रकाशित पुस्तकें
उपन्यास: देहाश्रम का मनजोगी, बेस्वाद मांस का टुकड़ा, वंश, रेत होते रिश्ते, आखेट महल, जल तू जलाल तू
कहानी संग्रह: अन्त्यास्त, मेरी सौ लघुकथाएं, सत्ताघर की कंदराएं, थोड़ी देर और ठहर
नाटक: मेरी ज़िन्दगी लौटा दे, अजबनार्सिस डॉट कॉम
कविता संग्रह: रक्कासा सी नाचे दिल्ली, शेयर खाता खोल सजनिया , उगती प्यास दिवंगत पानी
बाल साहित्य: उगते नहीं उजाले
संस्मरण: रस्ते में हो गयी शाम,
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washington me hui is paricharcha se sambandhit uttar yadi aap bhi dena chahen to comment ke roop me de sakte hain.
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