Monday, August 31, 2026

मैं जानता हूं कि...

 ये बात बहुत कॉमन है कि दो पीढ़ियों की सोच में अंतर होता ही है। चाहे दोनों के प्रतिनिधि आपस में पिता पुत्र ही क्यों न हों। एक साथ एक ही घर में एक सा अन्न खाते हुए और एक सी सुविधाएँ पाते हुए भी एक न एक दिन ये बात आ ही जाती है कि पिता को लगता है - इसे हमने जन्म दिया, हमने पाला पोसा, और आज ये हमें ज्ञान दे रहा है कि हमें क्या करना चाहिए क्या नहीं।

दूसरी ओर बेटे को लगता है कि ये अब भी मुझे बच्चा ही समझते हैं। अब मैं अपने पैरों पर खड़ा हूं, खुद कमाता हूं, मुझे अपने भले - बुरे का ध्यान है, अब इनका ज़माना नहीं रहा।

यही पीढ़ी अंतराल है। यह अकारण नहीं है। इसके बहुत से कारण हैं। अब हम एक - एक करके इनकी चर्चा करेंगे।

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