ये बात ठीक नहीं, पर किया क्या जाए?
मैं 73 साल का हो गया पर मुझे परस्पर संबंध मेंटेन करना नहीं आया। इस उलझन ने मेरी कई उपलब्धियों की भ्रूणहत्या की है, कई सफलताओं पर पानी फेरा है।
दरअसल मैं किसी से ( रिश्तेदारों को छोड़ कर ) "जैसे को तैसा" संबंध नहीं रख पाता। अर्थात मुझसे यह नहीं हो पाता कि किसी ने आगे बढ़ कर मेरी मदद की है तो मैं भी उसके लिए उतनी ही उदारता से हाथ बढ़ादूं। या यदि किसी ने मेरी निंदा, अवहेलना या उपेक्षा की है तो मैं भी उससे रंजिश पालने के स्तर तक व्यवहार करूँ।
ऐसा नहीं कि मैंने इस व्यवहार का कारण ढूंढने की कोशिश नहीं की। की है, ढूंढ भी लिया है, पर फ़िर भी मेरा मन जिसके साथ जुड़ता है उसने मेरे साथ चाहे जैसा भी व्यवहार किया हो, मैं उसका विरोधी नहीं हो पाता। इसके उलट, ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने मुझसे भरपूर आत्मीयता दर्शाई लेकिन मैं उनका नहीं हो पाया।
मेरा अपना पैमाना है।
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