Thursday, August 9, 2012

हिंसा को आम करने की कोशिशें

लगता है कि कुछ चीज़ें अब किसी के बस में नहीं रह गईं हैं.महिलाओं से  कहा जा रहा है कि वे पुरुषों की ऐसी वैसी टिप्पणियों पर ध्यान 'न' देना सीखें. पुलिस सम्पन्न लोगों से कह रही है कि अपनी कीमती चीज़ों की सुरक्षा वे अपने साधनों से करें.क्या यह असामाजिकता का सार्वजानिक स्वीकार नहीं है ? कहीं ऐसा तो नहीं ,कि हम सभ्यता से ऊब गए हैं ?    अमेरिका में यदि ऐसी घटनाओं पर राष्ट्र ध्वज आधा झुकाया जा सकता है तो यह सम्मान और सरोकार को सलाम करना ही है .

1 comment:

  1. ऐसी कोशिशें खतरनाक हैं चेतना जगाने की आवश्यकता और बढ रही है। सुज्ञ जी भी इसी विषय पर बात करते दिख रहे हैं यहाँ: http://shrut-sugya.blogspot.com/2012/08/blog-post_17.html

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