Sunday, August 19, 2012

ईद के मुबारक मौके पर मुझे बहुत सारे लोग बहुत याद आ रहे हैं

वाजिद साहब बिलकुल हमारे पडौसी थे, उनका पूरा परिवार -पप्पी, सन्नी विशेष रूप से, मेरे पहली क्लास के मित्र निजाम, और मुन्ना,  मेरे मित्र शमसुद्दीन,इस्माइल,इब्राहीम, अताउल्ला, रशीद,हनीफ,  नौकरी शुरू करने के दिनों के मित्र परवेज़, जावेद, इम्तियाज़,खुर्शीद साहब, अबरार साहब,आफरीदी जी, ...सूची बहुत लम्बी है, पर मैं आपके साथ ही ईद मना रहा हूँ ...आज सुबह से ही दो लोग और  मेरे साथ हैं- मेरे उपन्यास "रेत  होते रिश्ते " का नायक शाबान और  आने वाले उपन्यास [नाम नहीं बताऊंगा अभी ] का नायक किन्जान ! और मैं याद कर रहा हूँ अपने आदर्श उपन्यासकार डॉ.राही मासूम रज़ा साहब को भी। ईद मुबारक !  

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