अच्छी और प्रभावी तकनीक की पहचान यह है कि वह अपनाई जाये, शायद यही कारण है कि अब आप तकनीक को नहीं चुनते बल्कि तकनीक आपको चुनती है. कल्पना कीजिये कि आप बैठे हुए खीर खा रहे हैं, और एक बिल्ली बैठी लगातार आपको घूर रही है. आप जानते हैं, और सब जानते हैं कि क्यों ? आजकल ब्रांडेड तकनीक इसी बिल्ली की तरह व्यवहार कर रही है.आप कोई ज़रा सी भी गलती करें- कुछ गिरा दें , कहीं उठ कर चले जाएँ ,बस बिल्ली अपना काम कर लेगी. शुक्र है,अभी "बिल्ली " इतनी विकसित नहीं है कि खीर आपके हाथ से छीन ले . ओह,अभी भविष्य बाकी है .
प्रकाशित पुस्तकें
उपन्यास: देहाश्रम का मनजोगी, बेस्वाद मांस का टुकड़ा, वंश, रेत होते रिश्ते, आखेट महल, जल तू जलाल तू
कहानी संग्रह: अन्त्यास्त, मेरी सौ लघुकथाएं, सत्ताघर की कंदराएं, थोड़ी देर और ठहर
नाटक: मेरी ज़िन्दगी लौटा दे, अजबनार्सिस डॉट कॉम
कविता संग्रह: रक्कासा सी नाचे दिल्ली, शेयर खाता खोल सजनिया , उगती प्यास दिवंगत पानी
बाल साहित्य: उगते नहीं उजाले
संस्मरण: रस्ते में हो गयी शाम,
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शोध
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"राही रैंकिंग -2015" हिंदी के 100 वर्तमान बड़े रचनाकार रैंक / नाम 1. मैत्रेयी पुष्पा 2. नरेंद्र कोहली 3. कृष्णा सोबती 4....
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इस कशमकश से लगभग हर युवा कभी न कभी गुज़रता है कि वह अपने कैरियर के लिए निजी क्षेत्र को चुने, या सार्वजनिक। मतलब नौकरी प्राइवेट हो या सरकारी।...
mujhe billi ke samne baithe dekh kar bhi aap chup hain?
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