कल तारीखों का एक अद्भुत संयोग आया था. सदी का ११वा साल,साल का ११वा महीना, महीने का ११वा दिन. मैंने सोचा था इस मौके में दिन का ११वा घंटा और घंटे का ११वा मिनट भी जोड़ कर, आपसे कुछ ख़ास बात करूँ.
प्रकाशित पुस्तकें
उपन्यास: देहाश्रम का मनजोगी, बेस्वाद मांस का टुकड़ा, वंश, रेत होते रिश्ते, आखेट महल, जल तू जलाल तू
कहानी संग्रह: अन्त्यास्त, मेरी सौ लघुकथाएं, सत्ताघर की कंदराएं, थोड़ी देर और ठहर
नाटक: मेरी ज़िन्दगी लौटा दे, अजबनार्सिस डॉट कॉम
कविता संग्रह: रक्कासा सी नाचे दिल्ली, शेयर खाता खोल सजनिया , उगती प्यास दिवंगत पानी
बाल साहित्य: उगते नहीं उजाले
संस्मरण: रस्ते में हो गयी शाम,
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शोध
आपको क्या लगता है? शोध शुरू करके उसे लगातार झटपट पूरी कर देने पर नतीजे ज़्यादा प्रामाणिक आते हैं या फिर उसे रुक- रुक कर बरसों तक चलाने पर ही...
उत्कृष्ट प्रस्तुति , आभार.
ReplyDeletedhanywad, lekin is ajoobe awsar par aapse mera sampark toot gaya tha.
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