प्रकाशित पुस्तकें
उपन्यास: देहाश्रम का मनजोगी, बेस्वाद मांस का टुकड़ा, वंश, रेत होते रिश्ते, आखेट महल, जल तू जलाल तू
कहानी संग्रह: अन्त्यास्त, मेरी सौ लघुकथाएं, सत्ताघर की कंदराएं, थोड़ी देर और ठहर
नाटक: मेरी ज़िन्दगी लौटा दे, अजबनार्सिस डॉट कॉम
कविता संग्रह: रक्कासा सी नाचे दिल्ली, शेयर खाता खोल सजनिया , उगती प्यास दिवंगत पानी
बाल साहित्य: उगते नहीं उजाले
संस्मरण: रस्ते में हो गयी शाम,
Wednesday, January 26, 2011
अपने पैरों पर खड़े होने का सुख
अब मेरे पास कोई नहीं है । वैभव बहुत दूर भारत से बाहर है और आस्था राजस्थान से बाहर है.आज तो सोभेशजी भी नेपाल मैं हैं.कनिका महाराष्ट्र मैं हैं.ऐसा जरिया कौन सा हो सकता है कि इन सभी से एक साथ बात हो सके.बस यही बात मुझे संतोष दे रही है कि अपने ब्लॉग के madhyamसे यह संभव हो रहा है.मैं सबसे पहले उन लोगों को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने इस सुविधा को जन्म दिया है.शायद उन्हें लगा होगा कि सब के बीच बातों का आदान प्रदान जरूरी है चाहे कोई कितना भी दूर हो.आज २६ जनवरी है.भारत के लिए एक न भुलाया जा सकने वाला दिन.मुझे खुशी है कि मैं भी आज को अपने लिए महत्वपूर्ण दिन बना पाया हूँ.एक दिन वह भी था कि जब मैं कहा करता था कि यन्त्र हमारे जीवन की रफ़्तार रोक देंगे.आज मैं अपने शब्द वापस लेता हूँ। आज मैं कहूँगा कि यन्त्र हमारे ठहरे जीवन को रफ़्तार देने की ताकत रखते हैं.
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शोध
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समय और अनुभव के साथ हमारे विचार परिमार्जित होने ही चाहिए. (हाँ, सर्वज्ञानियों की बात अलग है)
ReplyDeleteगणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं