Thursday, April 6, 2017

वे क्या कहते हैं संयुक्त परिवार के बारे में !

वे कहते  हैं कि संयुक्त परिवार भारतीय समाज की विशेषता नहीं बल्कि मजबूरी है। यहाँ पर परिवार का कोई भी एक सदस्य आत्म निर्भरता के लिए शिक्षित-प्रशिक्षित नहीं है। कोई धनार्जन के लिए अशिक्षित है, कोई शारीरिक श्रम के लिए अक्षम या अनभ्यस्त है तो कोई घरेलू कामकाज में शून्य है। वे तभी रह सकते हैं जब वे मिलजुल कर रहें। यहाँ हज़ारों कमाने वाला नहाने के बाद तौलिया या जुराबें नहीं ढूंढ सकता। दस लोगों की रोटी बनाने वाली अकेले बाजार जाकर राशन-सब्ज़ी नहीं ला सकती। दिनरात बैठ कर हुक्का गुड़गुड़ाने वाला एक कप चाय नहीं बना सकता। वे जो कुछ कर सकते हैं उसमें भी अंध मान्यताओं की बेड़ियों में खुद को जकड़े पड़े हैं।
     

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